स्कूल प्रशासन की मिलीभगत से शिक्षा विभाग को लग रहा लाखों का चूना

पाठशालाओं में यूँ तो शिक्षा दी जाती रही है की ईमानदार बनो भ्रष्टाचार का मुकाबला करो किसी भी तरह की बेईमानी से बचो ना अनैतिक खाओ ना अनैतिक खाने दो इन सब का पाठ पढ़ाने वाले और इस विभाग के अधीनस्थ कर्मचारी ही गड़बड़ घोटाले में शामिल नज़र आरहे हैं। दरसअल ये सब शिक्षा विभाग के ब्लॉक शिक्षा अधिकारी के दफ्तर की नाक के नीचे ही चल रहा है और साहब को खबर तक नहीं।

मामला बड़ा दिलचस्प लेकिन खेदपूर्ण है।

राजस्थान शिक्षा विभाग में इतनी पोल है की अगर किसी स्कूल में आप चाहे एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ही क्यों न हों आपकी पहुँच वहां के प्रधान और बाबुओं तक है तो फिर आपको काम पर आने की कोई आवयश्यकता नहीं है आपका स्वस्थ्य ख़राब है तो भी आपकी हाज़री दस्तखत स्वतः दर्ज़ कर वेतन बैंक तक पहुंचा दिया जायेगा। ताउम्र आपकी अटेंडेंस रजिस्टर में लगती रहेगी चाहे आप स्थानीय अस्पताल में हो या दूसरे किसी राज्य के अस्पताल में। और मृत्यु के बाद मामूली वेरिफिकेशन करके आश्रित को तत्काल अनुकम्पा नियुक्ति भी।

देखें पूरा मामला – लगता है पूरे कुएँ में भांग घुली है

शिकायतकर्ता को सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त दस्तावेज़ों के अनुसार जयपुर के एक सरकारी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी पद पर रहे श्याम लाल पुत्र गुरु दयाल ने फ़र्ज़ी तरीके से तैयार की गयी किरायेनामे की रसीदों से किराया भत्ता प्राप्त किया। किरायेनामे की रसीदों में अन्यत्र जगह निवास बताया गया जबकि रह कही और रहा था। श्याम लाल वर्ष 2014 से सितम्बर 2017 तक स्कूल में अपने काम पर नहीं आया जिस पर स्कूल स्टॉफ ने हाज़री लगा कर पूरा वेतन वसूल किया जबकि उसे वीआरएस दिया जाना चाहिए था। करीब दो साल तक बिस्तर से नहीं उठ पाने की हालात में भी राज्य सरकार के कोष से पूर्ण वेतन जारी किया गया। शिकायतकर्ता के पास मौजूद दस्तावेज़ों के अनुसार जब श्यामलाल हॉस्पिटल में भर्ती था तब से मृत्यु पर्यन्त हॉस्पिटल और स्कूल दोनों जगह उपस्तिथि दर्ज़ है जो की असंभव है। 2017 में मौत के बाद सभी सरकारी परिलाभ इश्यू कर दिए गए। इतना ही नहीं मृत्यु के बाद श्याम लाल के छोटे बेटे राकेश शर्मा को अनुकम्पा नौकरी दी गयी जबकि राकेश पर आपराधिक किस्म के मामलों पर पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज़ है और ज़मानत पर बाहर है। नियुक्ति हेतु पुलिस वेरिफिकेशन पर भी सवालिया निशान है जो की विभाग में जमा करवाया गया है। इस सारे वाक्ये की जानकारी क्या विद्यालय प्रमुख को नहीं या विद्यालय की भूमिका भी संदिग्ध है।

शिकायतकर्ता ने जब इस मामले की सूचना सम्बंधित अधिकारिओं को दी तो सबूती दस्तावेज़ों के अभाव में शिकायत को दरकिनार कर जाँच को ठन्डे बस्ते में डाल दिया गया। इसके बाद शिकायतकर्ता ने उस मामले से सम्बंधित अहम् दस्तावेजों को सूचना के अधिकार के तहत प्राप्त कर उसी विभाग के आला अधिकारिओ को बतौर साक्ष्य शिकायत के साथ प्रस्तुत किया जिस पर मुख्य जिला शिक्षाधिकारी जयपुर प्रथम रतन सिंह ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जाँच हेतु आदेश किये। इसके बाद जाँच की फाइल ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रविंद्र सिंह के पास पहुंची।
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी रविंद्र सिंह ने बताया की ऐसे एक मामले की जाँच हमें ऊपर से सौंपी गयी है मामला दुर्भाग्यपूर्ण है और इस तरह के भ्रष्टाचार की जाँच के लिए मैंने तीन सदस्ययी कमेटी बनायीं है मैं खुद इसकी गहन पड़ताल पर नज़र रखूंगा।

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