भारत में कैसे अाते हैं रोहिंग्या, कौन कराता है घुसपैठ

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा है कि देश में रह रहे रोहिंग्या मुसलमान अवैध शरणार्थी हैं। इनसे देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा है, क्योंकि इनमें से कुछ आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। अवैध रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या 40 हजार से ज्यादा है। एजेंटों और दलालों के जरिए संगठित रूप से गैरकानूनी रोहिंग्याओं की म्यांमार से भारत में घुसपैठ कराई जा रही है। यह घुसपैठ पश्चिम बंगाल के बेनापोल-हरिदासपुर और हिल्ली तथा त्रिपुरा के सोनामोरा के अलावा कोलकाता और गुवाहाटी से कराई जाती है। सरकार ने कहा है कि हलफनामें में बताए गए तथ्यों के बारे में एजेंसियों द्वारा जुटाई गई संवेदनशील जानकारी सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी जाएगी।
हलफनामे में गृह मंत्रालय ने कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत देश में कहीं भी आने-जाने और बसने जैसे मूलभूत अधिकार नहीं दिए जा सकते। ये अधिकार सिर्फ देश के नागरिकों के लिए ही हैं। इन अधिकारों के संरक्षण की मांग को लेकर रोहिंग्या सुप्रीम कोर्ट में गुहार भी नहीं लगा सकते, क्योंकि वे इसके दायरे में नहीं आते हैं। उनका देश में रहना सुरक्षा को गंभीर खतरा है। 2012 से देश में उन्होंने अवैध तरीकों से प्रवेश किया। कई ने पैन कार्ड और वोटर आईडी भी बनवा लिए हैं।
सोमवार को मामला प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई पर लगा था। सरकार के अनुसार, रोहिंग्याओं को वापस भेजने का फैसला विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद लिया गया है। पीठ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी करने का याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषषण का अनुरोध भी फिलहाल स्वीकार नहीं किया।
केंद्र की दलीलें
-ये बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत-म्यांमार सीमा पार कर आ गए हैं।
-उत्तर-पूर्वी कॉरिडोर की स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।
-देश में बौद्धों के खिलाफ हिंसक कदम उठा सकते हैं।
-जम्मू, दिल्ली, हैदराबाद और मेवात में इनके आतंकी कनेक्शन की सूचना।
-ये आईएसआई, अलकायदा व अन्य आतंकी संगठनों से जुड़े हैं।
-मानव तस्करी, हवाला कारोबार व देश विरोधी कार्यो में लिप्त हैं।
-इनके कारण कई क्षेत्रों में आबादी का संतुलन गड़बड़ा गया है।
-संयुक्त राष्ट्र दस्तावेज विहीन शरणार्थियों को वापस जाना होगा।

..रोहिंग्याओं की दलीलें
-म्यांमार में व्यापक भेदभाव व हिंसा के कारण भारत में शरण ली।
-म्यांमार के रखाइन प्रांत से भारत व बांग्लादेश में ब़़डी संख्या में लोग आए।
-पूर्व में जो रोहिंग्या आए वे जम्मू, हैदराबाद, हरियाणा, उप्र, दिल्ली–एनसीआर व राजस्थान में बस गए।
-भारत ने मानवाधिकार संधि पर दस्तखत किए हैं, वह उन्हें देश से निकाल नहीं सकता।
-इसलिए रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस म्यांमार भेजने का फैसला अनुचित है।

इस मामले में सुनवाई होते ही प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एएसजी तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र आज ही हलफनामा दायर करेगा। इसके बाद कोर्ट ने अवैध रोहिंग्या को देश से निकालने के फैसले के खिलाफ जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को करने का फैसला किया। यह याचिका दो रोहिंग्या शरणार्थियों मोहम्मद सलीमुल्लाह और मोहम्मद शाकिर ने पेश की है। ये दोनों याचिकाकर्ता भारत में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग में रजिस्टर्ड हैं।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रोहिंग्या मामले में कहा कि हमने अपना पक्ष रख दिया है, अब जो भी फैसला लेना होगा वह सुप्रीम कोर्ट लेगा।

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