हर मोर्चे पर विफल प्रदेश सरकार – गहलोत

 

कांग्रेस संगठन महासचिव और राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सूबे की सरकार को बेरोजगारी,महंगाई,भ्रष्टाचार के मुद्दे पर घेरते हुए कई आरोप लगाए। पत्रकार वार्ता में बोलते हुए गहलोत ने राजे सरकार को हर मोर्चे पर फेल बताया,कहा कि  मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे गौरव यात्रा के दौरान बार-बार कह रही है कि कांग्रेस ने जो 50 साल में नहीं किया वो हमने 5 साल में कर दिखाया। जनता जानना चाहती है कि आपकी क्या-क्या उपलब्धियां हैं? आपने राजस्थान को हर क्षेत्र में कमजोर और बदनाम करने का ही काम किया है।  वसुन्धरा जी जिस प्रकार असत्य की राजनीति कर रही है, वह निन्दनीय है। गत 28 वर्षों में से 18 वर्ष तक प्रदेश में भाजपा का शासन रहा है।  अपने शासन के दस वर्षों के कार्यकाल के पांच-पांच ऐसे काम बतायें जो जनता की स्मृति में हो। कांग्रेस के दस साल के कार्यकाल में प्रदेश के समग्र विकास, अकाल प्रबन्धन, जन-कल्याणकारी योजनाएं, आधारभूत ढांचे का विकास आदि कार्य जग जाहिर हैं एवं राजस्थान के वर्तमान स्वरूप की जयपुर सहित पूरे देश में पहचान है।

कांग्रेस सरकार के समय भाजपा शासन में घोषित किसी भी योजना और कार्यक्रम का ना तो नाम बदला गया और ना ही नाम काटे गये जबकि राजे सरकार के दौरान पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की कई विकास योजनाओं और कार्यक्रमों के नाम बदल दिये गये है। आंगनबाड़ी कर्मियों के लिए स्थापित 100 करोड़ रूपये के आगंनबाड़ी कल्याणकोष, 200 करोड़ रूपये के अल्पसंख्यक कल्याण कोष, 100 करोड़ के ईबीसी कोष को रोक दिया गया। देवनारायण योजना के लिए भी 300 करोड का पैकेज घोषित किया था।
रिफाईनरी, मेट्रो सैकण्ड फेज, डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल परियोजना, परबन सिंचाई एवं पेयजल परियोजना, मेमू कोच फैक्ट्री, धौलपुर से सरमथुरा नैरोगेज का कन्वर्जन एवं सरमथुरा से गंगापुर तक नई ब्रॉडगेज लाईन, अजमेर-नसीराबाद-सवाईमाधोपुर रेल लाईन जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को क्यों लटकाये रखा। ऐसा करके राजस्थान के विकास को अवरूद्ध करने का अपराध वर्तमान भाजपा सरकार ने पिछले पांच सालों में किया है।
भामाशाह कार्ड बनाने में भी भयंकर भ्रष्टाचार हुआ। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना को लाकर इस सरकार ने भ्रष्टाचार को पनपाने के साथ-साथ निःशुल्क दवा योजना को कमजोर करने का ही काम किया है। इस संबंध में घोर लापरवाही बरती गयी। अब सीएजी की रिपोर्ट में भी इन योजनाओं के बारे में गंभीर टिप्पणी की गयी है।  बीमा कम्पनी और निजी अस्पतालों के बीच हुये गठजोड़ को लेकर बार-बार सवाल उठाये जा रहे है। हजारों रूपये के फर्जी बिल बनाकर भुगतान उठाया जाता रहा। चिकित्सा विभाग ने भी बीमा कम्पनी के 106 करोड़ रू. की प्रीमियम राशि को रोक दिया है। बीमा कम्पनी एवं निजी चिकित्सालयों के बीच पैदा हुए विवाद का अविलम्ब हल निकालना चाहिए।
कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई एवं पेट्रोल-डीजल की बढ़ी दरों के विरोध में भारत बंद का सफल आयोजन किया, राजस्थान सहित देश भरत में भारत बंद को भरपूर जन समर्थन मिला। इसके बावजूद भी सरकार की आंखे नहीं खुली। कांग्रेस के दबाव को देखते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेश में पेट्रोल-डीजल का 4 प्रतिशत वेट कम करना पड़ा, जो नाकाफी है। पेट्रोल-डीजल को जी.एस.टी. के दायरे में लाना चाहिये और रोज जो दरें बढ़ रही हैं, उसको बंद किया जाना चाहिए।
रसोई पर महंगाई के बढते दबाव के बावजूद गैस सिलेण्डर में कोई कमी नहीं की गयी। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने प्रति सिलैण्डर 25 रूपये की कमी की थी। गैस सिलेण्डर की बढ़ती कीमतों को देखते हुए सरकार को कम से कम 100 रूपये प्रति सिलेण्डर की राहत प्रदान करनी चाहिये।
चुनाव के दौरान वसुंधरा राजे ने 15 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने का वायदा किया था। राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी की दर 6 प्रतिशत है, जबकि राजस्थान में यह 10 प्रतिशत तक पहुंच गई है जो चिंताजनक है।
मुख्यमंत्री युवाओं को 16 लाख नौकरियां उपलब्ध कराने का लगातार दावा कर रही है जबकि सी.ए.जी. की हॉल ही में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार आरएसएलडीसी से 1,27,817 प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं में से 42,758 युवाओं को ही रोजगार दिया गया है, जिसके सत्यापन पर मात्र 9,904 वास्तविक पाये गये।
भाजपा सरकार ने प्रदेश में पहली बार लाभार्थी और वंचित के नाम से दो अलग-अलग वर्ग बना दिये हैं। पहले प्रधानमंत्री का लाभार्थी संवाद, मुख्यमंत्री का एससी/एसटी, सफाई कर्मचारी तथा नवनियुक्त शिक्षकों तथा अब पुलिसकर्मियों को बुलाकर राजनीतिक हित साधने के लिये लाभार्थी संवाद आयोजित कर रही है, ऐसा करके मुख्यमंत्री राजस्थान को कहां ले जायेगी। इसका जनता आगामी चुनावों में सबक सिखायेगी।
राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के लाभान्वित परिवारों के लिये भामाशाह डिजिटल परिवार योजना लागू कर सरकारी खजाने से मोबाईल हेतु एक-एक हजार रूपये की राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इस योजना पर खर्च होने वाले 1000 करोड़ रूपये का लाभ कम्पनी विशेष को ही मिलेगा। सरकारी मशीनरी एवं जनता के पैसे का ऐसा दुरूपयोग पहली बार हो रहा है।
गौरव यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री इसी तरह कई ऐसी लोक-लुभावन घोषणायें कर राजनीतिक हित साधने का असफल प्रयास कर रही है। जिनके लिये ना तो कोई बजट प्रावधान है और ना ही इन घोषणाओं को पूरा करना अब उनके बस में है। मुख्यमंत्री ने चुनाव के समय पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर कल्याणकारी योजनाओं बजट प्रावधानाओं के साथ लागू करने पर रेवड़िया बांटने का आरोप लगाया था, लेकिन अब वे खुद बिना बजट के क्या कर रही हैं?
माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय ने भी गौरव यात्रा के दौरान सरकारी कार्यक्रमों के आयोजन के नाम पर सरकारी पैसे के खर्च पर रोक लगा दी है। बावजूद इसके भाजपा सरकार द्वारा सरकारी पैसे एवं मशीनरी का दुरूपयोग किया जा रहा है।
सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार कांग्रेस के समय राज्य पर वर्ष 2012-13 में 1,17,809 करोड़ रूपये का कर्ज भार था आज उसके दुगने से भी अधिक कर्ज राज्य की जनता पर डाल दिया गया है। वर्ष 2018-19 के बजट अनुमानों के अनुसार अब राज्य पर कुल कर्जा 3.08 लाख करोड़ रूपये (उदय योजना सहित) हो गया है।
आज गांव गरीब एवं किसान सरकारी उपेक्षा के कारण परेशान और बेबस है। भाजपा सरकार के दौरान राजस्थान में पहली बार उपज के सही मूल्य नहीं मिलने और कर्ज के दबाव के कारण किसान लगातार आत्महत्या के लिये मजबूर हो रहे है। फसल बीमा योजना के नाम से किसानों को लूटा जा रहा है और बीमा कम्पनियों को ही फायदा पहुंचाने का कार्य किया गया है।
यूपीए सरकार द्वारा ग्रामीण, गरीबी उन्मूलन एवं रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू की गयी ‘नरेगा‘ योजना को चौपट कर दिया। भुगतान जान-बूझकर 6-8 महिन तक नहीं किया गया, जिससे मजदूरों ने काम मांगना बंद कर दिया।
प्रदेश के कई गांव अकाल की चपेट में है, जिस और मुख्यमंत्री का कोई ध्यान नहीं है। वे तो केवल चुनरिया ओढ़ने एवं थोथी घोषणाएं करने में ही आत्ममुग्ध हो रही है। भले ही जनता बिजली, पानी और अकाल की समस्याओं से परेशान हो।
पेयजल समस्या से झूझ रहे प्रदेश की हजारों करोड़ रूपये की योजनाओं को समयबद्धता से पूरा नहीं करने के कारण जनता परेशान हो रही है। इस संबंध में कैग द्वारा भी सरकार की अकर्मण्यता पर सवाल उठाए गये है। भाजपा सरकार ने इंदिरा गांधी नहर, चंबल, माही, नर्मदा आदि स्रोतों पर आधारित 22 हजार करोड़ रूपये की योजनाओं की गति को कमजोर कर दिया है।
कांग्रेस सरकार की प्राथमिकता में जहां रिफायनरी, परवन सिंचाई एवं पेयजल परियोजना, मैमू कोच फैक्ट्री, मैट्रो, डूंगरपुर-बांसवाडा-रतलाम रेल परियोजना, धौलपुर से सरमथुरा नैरोगेज का कन्वर्जन एवं सरमथुरा से गंगापुर तक नई ब्रॉडगेज लाईन, अजमेर-नसीराबाद-सवाईमाधोपुर रेल लाईन जैसी महत्वाकांक्षी विकास परियोजनाऐं रही। वहीं राजे सरकार की प्राथमिकता में खान, पेयजल, परिवहन, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, आर.टी.डी.सी. होटलों को बेचना, शहरों की बेशकीमती जमीनों की खरीद-फरोख्त, स्मार्ट सिटी और आई.टी. हब के नाम से अधिकारियों के साथ मिलकर भ्रष्टाचार को पनपाना एवं भ्रष्टाचारी अधिकारियों को बचाना ही रहा है।
राजे सरकार में कानून के शासन के प्रति आमजन का इकबाल खत्म सा हो गया। दुष्कर्म, डकैती, चोरी, लूट एवं चेन स्नैचिंग की घटनाएं रोजमर्रा होने लगी है। दलितों पर उत्पीड़न की घटनाएं बढ़ी है। इन वर्गो के प्रति अधिक अपराध हो रहे है। प्रतिदिन प्रदेश में दुष्कर्म की 10 घटनाएं और गैंगरेप हो रहे है। प्रदेश में 3-4 साल की बच्चियों के साथ दुष्कर्म होने की घटनाओं से प्रदेश शर्मसार है। चित्तौड़गढ़ में तो नाबालिग बच्ची के साथ हुई दरीदंगी के बाद उसका जीवन बचाने के लिये गर्भाशय (न्जमतने) तक निकालना पड़ा। अब वो जीवनभर मां नहीं बन सकेगी। राजधानी जयपुर में पुलिस की लापरवाही की वजह से आए दिन घटित होने वाली डकैती की घटनाओं से आमजन में असुरक्षा का भाव व्याप्त हो गया है। गोपालपुरा बाईपास स्थित 10बी स्कीम एवं मानसरोवर क्षेत्र में घटित डकैती की घटना एवं डकैतों द्वारा मकान मालकिन की निर्ममता से हत्या कर दी गयी। यदि पुलिस ने तत्परता दिखाई होती तो वारदात रोकी जा सकती थी। इसी तरह पूर्व में वैशाली नगर में पति के सामने पत्नी का दुष्कर्म कर डकैती की घटना हुयी जो सरकार के लिये शर्मनाक है।
प्रदेश में पहली बार राजे सरकार में मॉब लिंचिंग की घटनाएं घटित हो रही है। अलवर में पहले पहलू खान को भीड़ ने मार डाला, और फिर रामगढ़ में रकबर की मौत हुयी। प्रतापगढ़ में जफर हुसैन पर हमला किया गया। राजसंमद में बंजारा लोगों पर हमला किया गया। भीलवाड़ा में ट्रक जला दिया गया और तमिलनाडू सरकार के अधिकारियों पर हमला किया गया। झालावाड़ सिविल सोसाइटी द्वारा आयोजित जवाबदेही यात्रा पर भाजपा विधायक की अगुवाई में सशस्त्र भीड़ द्वारा हमला। अलवर के रकबर की मौत को लेकर गृहमंत्री श्री गुलाब चंद कटारिया ने पहले कहा कि रकबर की मौत पुलिस स्टेशन में हुयी और बाद में कहा कि भीड़ ने उसे मारा। ये स्थिति तो राज्य के गृहमंत्री की है। यदि मुख्यमंत्री शुरू से ही कानून व्यवस्था की स्थिति पर ध्यान देती तो तो घटनायें नहीं होती और उनकी पुनरावृत्ति को भी रोका जा सकता था।
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