Exit Poll:-2019 लोकसभा चुनावी नतीजों का आंकलन,

लोकसभा चुनाव के सभी चरण खत्म होने के बाद सबकी नजरें एग्जिट पोल पर टिक गई हैं। विभिन्न टीवी न्यूज चैनल्स और पोल एजेंसियां एग्जिट पोल (Exit Polls 2019) के आंकड़े जारी करेंगे। एग्जिट पोल विभिन्न न्यूज चैनल्स और एजेंसियों द्वारा कराए जाते हैं। इनमें जो एग्जिट पोल प्रमुख हैं, उनके नाम इंडिया टुडे-एक्सिस एग्जिट पोल (India Today- Axis Exit Poll), एबीपी न्यूज एग्जिट पोल (ABP News Exit Poll), न्यूज 18-आईपीएसओएस एग्जिट पोल (News 18 Exit Poll), टुडेज चाणक्य एग्जिट पोल (Today’s Chanakya Exit Poll), सी-वोटर एग्जिट पोल (C Voter Exit Poll)। इसके अलावा टाइम्स नाऊ-ओआरजी एग्जिट पोल (Times Now-ORG Exit Poll), रिपब्लिक टीवी एग्जिट पोल (republic tv exit poll) आदि की घोषणा होगी।

सर्वे/एजेंसी                    भाजपा+           कांग्रेस+             सपा+बसपा        अन्य
सी वोटर-रिपब्लिक           287                128                        40                 87
जन की बात-रिपब्लिक      305               124                         26                87
वीएमआर-टाइम्स नाउ      306                132                        20              84
न्यूज नेशन                        286               122                        —              134

 टाइम्स नाऊ के अनुसार, एनडीए को 306 सीटों का अनुमान, यूपीए को मिल सकती हैं 132 सीटें

इंडिया टुडे-AXIS के अनुसार, महाराष्ट्र में NDA को 38-42 सीटों का अनुमान

इंडिया टुडे के अनुसार, छत्तीसगढ़ में बीजेपी को सात से आठ सीटों का अनुमान, कांग्रेस को तीन से चार सीटों का अनुमान।

आजतक के अनुसार, राजस्थान में 23-25 सीटों पर बीजेपी की जीत का अनुमान, कांग्रेस को मिल सकती हैं 0-2 सीटें।

रिपब्लिक और जन की बात के एग्जिट पोल के अनुसार, एनडीए को मिल सकती हैं 287 सीटें, यूपीए को 128 सीटों का अनुमान।

आज तक के अनुसार, MP में BJP को मिल सकती हैं 26-28 सीटें, कांग्रेस को एक से 3 सीटों का अनुमान

लोकसभा चुनाव के सातवें चरण की 59 सीटों पर मतदान शाम छह बजते ही समाप्त हो गया है। हालांकि, जो लाइन में खड़े हैं, वे वोट डाल सकेंगे। वहीं, एग्जिट पोल के आंकड़े शाम साढ़े छह बजे से जारी होंगे।

लोकसभा चुनाव के सातवें चरण की बात करें तो झारखंड के तीन लोकसभा सीटों पर अपराह्न तीन बजे तक लगभग 64.81 प्रतिशत मतदान हो चुका है जिसमें राजमहल सीट पर 64.68 प्रतिशत, दुमका में 66.79 तथा गोड्डा में 63.30 प्रतिशत मतदान रिकार्ड किया गया है।

लोकसभा चुनाव के सातवें चरण का मतदान शाम को समाप्त होगा। इसके बाद एग्जिट पोल के नतीजे देखे जा सकेंगे।

लोकसभा चुनाव के अंतिम चरण में पंजाब की सभी 13 सीटों, उत्तर प्रदेश की 13, पश्चिम बंगाल की नौ, बिहार और मध्य प्रदेश की आठ-आठ, हिमाचल प्रदेश की चार, झारखंड की तीन तथा चंडीगढ़ की एक सीट पर वोट डाले जा रहे हैं। इस चरण में 10.1 करोड़ से ज्यादा मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं। चुनाव आयोग ने 1.12 लाख से ज्यादा मतदान केंद्र बनाए हैं और मतदान सुचारू रूप के कराने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है।

शेयर बाजारों की दिशा इस सप्ताह एग्जिट पोल और 23 मई को आम चुनावों के नतीजों से तय होगी। इसके अलावा कुछ महत्वपूर्ण कंपनियों के वित्तीय नतीजों का भी बाजार पर असर पड़ सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि चुनाव संबंधी घटनाक्रमों से बाजार में उतार-चढ़ाव रह सकता है। भाषा के अनुसार, एग्जिट पोल के परिणाम 19 मई को आखिरी चरण का मतदान संपन्न होने के साथ आने लगेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतिम चुनाव नतीजों तक शेयर बाजार का रुख असमंजस वाला रह सकता है। 

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भाजपा के लिए खतरे की घंटी

एससी/ एसटी अत्याचार निरोधक कानून पर भाजपा में सवर्ण नेताओं की चिंता बढ़ने लगी है। भाजपा की चिंता है कि इस मामले की वजह से पार्टी का हिंदुत्व कार्ड कमजोर न पड़ जाए। पार्टी के एक सांसद ने कहा कि हिंदुत्व के मसले पर पार्टी को अगड़ी जातियों के बड़े वर्ग का समर्थन मिलता रहा है। इन जातियों का मोहभंग पार्टी के लिए खतरे की घंटी हो सकता है। करीब दर्जन भर नेताओं ने अलग अलग तरीके से पार्टी को अपना फीडबैक देकर उत्तरप्रदेश सहित कई जगहों पर पनप रहे आक्रोश की जानकारी दी है।

दुरुपयोग रोकने का भरोसा दें

पूर्व केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्र के बाद कई अन्य नेताओं ने इस मामले में आलाकमान को अपना फीडबैक दिया है। बांदा से भाजपा सांसद भैरो प्रसाद मिश्र ने कहा कि एससी/एसटी कानून से लोगों को आशंका है कि इस मामले में बिना जांच के जेल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि दहेज कानून हो, महिलाओं से छेड़छाड़ का कानून हो या फिर एससी/ एसटी कानून इसका दुरुपयोग होता रहा है। कई बार विरोधी इसे हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इनका दुरुपयोग रोकने का भरोसा दिया जाना चाहिए।

दिशानिर्देश जारी करे सरकार

भाजपा सांसद ने कहा कि कानून का दुरुपयोग रोकने के लिए एक स्पष्ट दिशानिर्देश जारी होना चाहिए। भाजपा सांसद ने कहा कि लोगों में गुस्सा है। यह आशंका है कि रिपोर्ट दर्ज होते ही कार्रवाई हो जाएगी। उन्होंने कहा, रिपोर्ट तुरंत दर्ज हो इसमें आपत्ति नहीं है। लेकिन रिपोर्ट दर्ज होने के बाद उचित जांच के बाद ही कोई कार्रवाई होगी यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए।

अपना दल सांसद ने कहा- जांच के बाद एफआईआर हो

सहयोगी दल अपना दल के सांसद कुंवर हरिवंश सिंह ने ‘हिन्दुस्तान’ से कहा कि एससी/ एसटी ऐक्ट में बिना जांच के एफआईआर दर्ज नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कोई भी इसका दुरुपयोग कर सकता है। सिंह ने कहा, सरकार ने दलित सांसदों के दबाव में आकर जल्दी में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को बदलने का फैसला किया। उन्होंने कहा पैसे लेकर कोई आरोप लगा दे और आरोपी व्यक्ति को बिना जांच के छह माह के लिए जेल भेज दिया जाएगा। सांसद ने कहा, हमने इस मामले में 9 सितंबर को अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा की बैठक बुलाई है। बैठक के निर्णय से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को अवगत कराया जाएगा। कई सांसद नाम न छापने की शर्त पर इस मामले में नुकसान की बात कर रहे हैं। एक सांसद ने कहा कि पार्टी को संतुलन के लिए तुरंत कदम उठाना चाहिए।

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एससी/एसटी एक्ट के खिलाफ सवर्णो का भारत बंद

अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार अधिनियम (एससी/एक्ट कानून) को लेकर लाए गए अध्यादेश के खिलाफ कथित तौर पर सवर्ण समुदाय तरफ से बुलाए गए भारत बंद का देशभर में व्यापक असर देखने को मिल रहा है।मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार समेत कई राज्यों में लोग इसके खिलाफ सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

बिहार में कई जगहों पर बाजार बंद नजर आ रहा है और भारत बंद का आह्वान कर रहे लोग जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ के मुंगेर और दरभंगा में ट्रेनों को रोक दिया गया है। जबकि, उत्तर प्रदेश के वाराणसी में लोग सड़कों पर उतर कर इसका विरोध कर रहे हैं।

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अटल बिहारी वाजपेयी संक्षिप्त जीवन परिचय

पूर्व प्रधानमंत्री श्री अटल बिहारी वाजपेयी भारत माता के एक ऐसे सपूत हैं, जिन्होंने स्वतंत्रता से पूर्व और पश्चात भी अपना जीवन देश और देशवासियों के उत्थान एवं कल्याण हेतु जिया तथा जिनकी वाणी से असाधारण शब्दों को सुनकर आम जन उल्लासित होते रहे और जिनके कार्यों से देश का मस्तक ऊंचा हुआ. मघ्य प्रदेश के ग्वालियर में एक ब्राह्मण परिवार में 25 दिसंबर, 1924 को इनका जन्म हुआ. पुत्रप्राप्ति से हर्षित पिता श्री कृष्ण बिहारी वाजपेयी को तब शायद ही अनुमान रहा होगा कि आगे चलकर उनका यह नन्हा बालक सारे देश और सारी दुनिया में नाम रौशन करेगा।

इन्होंने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज – जो अब लक्ष्मीबाई कॉलेज कहलाता है – में तथा कानपुर उ. प्र. के डी. ए. वी. कॉलेज में शिक्षा ग्रहण की और राजनीति विज्ञान में एम. ए.की उपाधि प्राप्त की. सन् 1993 मे कानपुर विश्वविद्यालय द्वारा दर्शन शास्त्र में पी.एच डी की मानद उपाधि से सम्मानित किए गए।
भारतीय स्वातंत्र्य-आंदोलन में सक्रिय योगदान कर 1942 में जेल गए। वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सक्रिय सदस्य और सन् 1951 में गठित राजनैतिक दल ‘भारतीय जनसंघ’ के संस्थापक सदस्य थे. सन् 1966-67 सरकारी प्रत्याभूतियों की समिति के अघ्यक्ष, सन् 1967 से 70 तक लोक लेखा समिति के अघ्यक्ष रहे। सन् 1968 से 73 तक वे भारतीय जनसंघ के अघ्यक्ष थ। . सन् 1975-77 के दौरान आपातकाल में बंदी रहे। 1977 से 79 तक भारत के विदेश मंत्री, सन् 1977 से 80 तक जनता पार्टी के संस्थापक सदस्य, सन् 1980-86 भाजपा अघ्यक्ष, सन् 1980-84 , 1986 तथा 1993-96 के दौरान भाजपा संसदीय दल के नेता रहे। सन् 1957 में दूसरी लोकसभा के लिए प्रथम बार निर्वाचित हुए. तब से 2004 में 14वीं लोकसभा हेतु हुए संसदीय आम चुनाव तक ये उत्तर प्रदेश में लखनऊ से प्रत्याशी होकर निर्वाचित होते रहे। सन् 1962-67 और 1986-91 के दौरान राज्य सभा के सम्मानित सदस्य रहे और सन् 1988 से 89 तक सार्वजनिक प्रयोजन समिति के सदस्य. ये सन् 1988-90 में संसद् की सदन समिति तथा व्यापारिक परामर्श समिति के सदस्य रहे. सन् 1990-91 में याचिका समिति के अघ्यक्ष बने और सन् 1993 से 1996 तक तथा 1997 -98 में विदेश नीति समिति के अघ्यक्ष रहे. सन् 1993-96 और 1996-97 में लोक सभा में प्रतिपक्ष के नेता थे.
सन् 1999 में लोक सभा में भाजपा संसदीय दल के नेता और सन् 2004 में भाजपा और एनडीए संसदीय दल के अघ्यक्ष रहे।

भारत के बहुदलीय लोकतंत्र में ये ऐसे एकमात्र राजनेता हैं, जो प्रायः सभी दलों को स्वीकार्य रहे। इनकी विशेषता के कारण ये 16 मई, 1996 से 31 मई, 1996 तथा 1998 – 99 और 13 अक्तूबर, 1990 से मई, 2004 तक तीन बार भारत के प्रधानमंत्री रहे। भारत की संस्कृति, सभ्यता, राजधर्म, राजनीति और विदेश नीति की इनको गहरी समझ है. बदलते राजनैतिक पटल पर गठबंधन सरकार को सफलतापूर्वक बनाने, चलाने और देश को विश्व में एक शक्तिशाली गणतंत्र के रूप में प्रस्तुत कर सकने की करामात इन जैसे करिश्माई नेता के बूते की ही बात थी।
प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल में जहां इन्होंने पाकिस्तान और चीन से संबंध सुधारने हेतु अभूतपूर्व कदम उठाए वहीं अंतर राष्ट्रीय दवाबों के बावजूद गहरी कूटनीति तथा दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रदर्शन करते हुए पोकरण में परमाणु विस्फोट किए तथा कारगिल-युद्ध जीता।

राजनीति में दिग्गज राजनेता, विदेश नीति में संसार भर में समादृत कूटनीतिज्ञ, लोकप्रिय जननायक और कुशल प्रशासक होने के साथ-साथ ये एक अत्यंत सक्षम और संवेदनशील कवि, लेखक और पत्रकार भी रहे हैं। विभिन्न संसदीय प्रतिनिधिमंडलों के सदस्य और विदेश मंत्री तथा प्रधानमंत्री के रूप में इन्होंने विश्व के अनेक देशों की यात्राएं की हैं और भारतीय कुटनीति तथा विश्वबंधुत्व का घ्वज लहराया है. राष्ट्र धर्म (मासिक), पाञ्चजन्य (साप्ताहिक), स्वदेश (दैनिक), और वीर अर्जुन (दैनिक), पत्र-पत्रिकाओं के आप संपादक रह चुके हैं। विभिन्न विषयों पर इनके द्वारा रचित अनेक पुस्तकें और कविता संग्रह प्रकाशित हैं.आजीवन अविवाहित, अद्भुत व्यक्तित्व के घनी श्री वाजपेयी पढ़ने -लिखने, सिनेमा देखने, यात्राएं करने और खाना पकाने-खाने के शौकीन हैं। देश की आर्थिक उन्नति, वंचितों के उत्थान और महिलाओं तथा बच्चों के कल्याण की चिंता उन्हें हरदम रहती है। राष्ट्र सेवा हेतु राष्ट्रपति द्वारा पद्म विभूषण से अलंकृत वाजपेयी 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार और सर्वोत्तम सांसद के भारतरत्न पंडित गोविन्द बल्लभ पंत पुरस्कार आदि अनेक पुरस्कारों, सम्मानों से विभूषित तथा सम्मानित हैं. कई प्रतिष्टित संस्थाओं-संगठनों और समितियों के आप सम्मानित सदस्य हैं.

कई दशकों तक भारतीय राजनैतिक पटल पर छाये रहने के बाद अपने स्वास्थ्यजनित शारीरिक अक्षमता के कारण वर्तमान राजनैतिक परिदृश्य में आप ओझल हो गए से प्रतीत होते हैं, किन्तु मानसिक रूप से आप अभी भी पूर्णरूपेण सजग, सबल और सक्रिय हैं तथा पार्टी और संगठन को दिशा दे रहे है। भारत को सफल नेतृत्व देने वाले प्रधानमंत्रियों में अग्रगण्य अटल बिहारी वाजपेयी के स्वास्थ्य और दीर्धायु की हम कामना करते हैं।

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टेलेंटेड खिला़डियो के साथ लगातार धोखा, इसलिए नहीं ला पाता भारत ओलम्पिक में गोल्ड

जयपुर में खिलाड़ियो के साथ हो रहा अन्याय थमने का नाम नहीं ले रहा है। खिलाड़ियो को उनकी प्रतिभा नहीं, बल्कि उनकी पहुंच देखकर सलेक्ट किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला जयपुर में पावर लिफ्टिंग बैंच प्रेस प्रतियोगिता में देखने को मिला है। जिसमें तीन गोल्ड मैडल प्राप्त खिलाड़ियो की अनदेखी की गई और उनकी जगह दूसरे रसूख वाले खिलाड़ियो को नेशनल में भेजा गया। स्टेट लेवल पर दौसा बांदीकुई में हुई प्रतियोगिता में अशोक शर्मा, सत्यनारायण माली और गोपाल मीणा ने दिसंबर में गोल्ड जीता था लेकिन फिर भी उन्हे नेशनल में नहीं शामिल किया गया। उनका कहना है कि लगातार उन्हे आश्वासन तो मिलते रहे लेकिन अधिकारियो ने उनके साथ धोखा करते हुए उनकी जगह नेशनल खेलने के लिए दूसरे खिलाड़ियो को भेज दिया।

ये खिलाड़ी उनके साथ हुए धोखे का सीधा इल्ज़ाम लगा रहे है राज्य पावर लिफ्टिंग के सचिव विनोद साहू पर… खिलाड़ियो का कहना है कि उन्हे राज्य प्रतियोगिता में प्रथम आने की सूचना भी सचिव द्वारा नहीं दी गई… जबकी इन्होने इस प्रतियोगिता की एंट्री फीस वगैरह सब जमा करवाई थी। इसके बाद इन खिलड़ियो के लाख कहने पर भी इन्हे नेशनल गेम्स की जानकारी नहीं दी गई। खिला़डियो का कहना है कि उन्होने वाट्सएप्प, मैसेज और लेटर सहित हर तरीके से सचिव से संपर्क किया …पर सचिव ने उन्हे कोई जवाब ही नहीं दिया। ये तीनो खिला़डी अब सचिव पर कार्रवाई की मांग करते हुए राज्य सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग कर रहे है ।

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भारत में कैसे अाते हैं रोहिंग्या, कौन कराता है घुसपैठ

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में कहा है कि देश में रह रहे रोहिंग्या मुसलमान अवैध शरणार्थी हैं। इनसे देश की सुरक्षा को गंभीर खतरा है, क्योंकि इनमें से कुछ आतंकी संगठनों से जुड़े हैं। अवैध रोहिंग्या शरणार्थियों की संख्या 40 हजार से ज्यादा है। एजेंटों और दलालों के जरिए संगठित रूप से गैरकानूनी रोहिंग्याओं की म्यांमार से भारत में घुसपैठ कराई जा रही है। यह घुसपैठ पश्चिम बंगाल के बेनापोल-हरिदासपुर और हिल्ली तथा त्रिपुरा के सोनामोरा के अलावा कोलकाता और गुवाहाटी से कराई जाती है। सरकार ने कहा है कि हलफनामें में बताए गए तथ्यों के बारे में एजेंसियों द्वारा जुटाई गई संवेदनशील जानकारी सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपी जाएगी।
हलफनामे में गृह मंत्रालय ने कहा कि रोहिंग्या शरणार्थियों को संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत देश में कहीं भी आने-जाने और बसने जैसे मूलभूत अधिकार नहीं दिए जा सकते। ये अधिकार सिर्फ देश के नागरिकों के लिए ही हैं। इन अधिकारों के संरक्षण की मांग को लेकर रोहिंग्या सुप्रीम कोर्ट में गुहार भी नहीं लगा सकते, क्योंकि वे इसके दायरे में नहीं आते हैं। उनका देश में रहना सुरक्षा को गंभीर खतरा है। 2012 से देश में उन्होंने अवैध तरीकों से प्रवेश किया। कई ने पैन कार्ड और वोटर आईडी भी बनवा लिए हैं।
सोमवार को मामला प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सुनवाई पर लगा था। सरकार के अनुसार, रोहिंग्याओं को वापस भेजने का फैसला विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद लिया गया है। पीठ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को नोटिस जारी करने का याचिकाकर्ताओं के वकील प्रशांत भूषषण का अनुरोध भी फिलहाल स्वीकार नहीं किया।
केंद्र की दलीलें
-ये बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत-म्यांमार सीमा पार कर आ गए हैं।
-उत्तर-पूर्वी कॉरिडोर की स्थिति को और बिगाड़ सकते हैं।
-देश में बौद्धों के खिलाफ हिंसक कदम उठा सकते हैं।
-जम्मू, दिल्ली, हैदराबाद और मेवात में इनके आतंकी कनेक्शन की सूचना।
-ये आईएसआई, अलकायदा व अन्य आतंकी संगठनों से जुड़े हैं।
-मानव तस्करी, हवाला कारोबार व देश विरोधी कार्यो में लिप्त हैं।
-इनके कारण कई क्षेत्रों में आबादी का संतुलन गड़बड़ा गया है।
-संयुक्त राष्ट्र दस्तावेज विहीन शरणार्थियों को वापस जाना होगा।

..रोहिंग्याओं की दलीलें
-म्यांमार में व्यापक भेदभाव व हिंसा के कारण भारत में शरण ली।
-म्यांमार के रखाइन प्रांत से भारत व बांग्लादेश में ब़़डी संख्या में लोग आए।
-पूर्व में जो रोहिंग्या आए वे जम्मू, हैदराबाद, हरियाणा, उप्र, दिल्ली–एनसीआर व राजस्थान में बस गए।
-भारत ने मानवाधिकार संधि पर दस्तखत किए हैं, वह उन्हें देश से निकाल नहीं सकता।
-इसलिए रोहिंग्या मुस्लिमों को वापस म्यांमार भेजने का फैसला अनुचित है।

इस मामले में सुनवाई होते ही प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष एएसजी तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र आज ही हलफनामा दायर करेगा। इसके बाद कोर्ट ने अवैध रोहिंग्या को देश से निकालने के फैसले के खिलाफ जनहित याचिका पर अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को करने का फैसला किया। यह याचिका दो रोहिंग्या शरणार्थियों मोहम्मद सलीमुल्लाह और मोहम्मद शाकिर ने पेश की है। ये दोनों याचिकाकर्ता भारत में संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग में रजिस्टर्ड हैं।
गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने रोहिंग्या मामले में कहा कि हमने अपना पक्ष रख दिया है, अब जो भी फैसला लेना होगा वह सुप्रीम कोर्ट लेगा।

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राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हैं रोहिंग्या, कोर्ट इस मामले में दखल न दे : सरकार

केंद्र ने कहा है कि कोर्ट को इस मुद्दे को सरकार पर छोड़ देना चाहिए और देशहित में सरकार को नीतिगत फैसले लेने दिया जाए. कोर्ट को इसमें दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि याचिका में जो विषय दिया गया है, उससे भारतीय नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर विपरीत पर असर पड़ेगा. ये राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है. सरकार ने कहा कि कुछ रोहिंग्या देशविरोधी और अवैध गतिविधियों में शामिल हैं, जैसे हुंडी, हवाला चैनल के जरिये पैसों का लेनदेन, रोहिंग्याओं के लिए फर्जी भारतीय पहचान संबंधी दस्तावेज़ हासिल करना और मानव तस्करी आदि. सरकार ने कहा कि कई रोहिंग्या अवैध नेटवर्क के जरिये भारत में घुस आते हैं और पैन कार्ड और वोटर कार्ड हासिल कर लेते हैं.

हलफनामे में कहा गया कि केंद्र सरकार ने यह भी पाया है पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई और आतंकी संगठन ISIS तथा अन्य आतंकी ग्रुप बहुत सारे रोहिंग्याओं को भारत के संवेदनशील इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा फैलाने की साजिश में शामिल किए हुए है. कुछ आतंकवादी पृष्ठभूमि वाले रोहिंग्याओं की जम्मू, दिल्ली, हैदराबाद और मेवात में पहचान की गई है. ये देश की आंतरिक और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकते हैं. केंद्र सरकार ने कहा कि रोहिंग्या को यहां रहने की इजाजत दी गई, तो यहां रहने वाले बौद्धों के खिलाफ हिंसा होने की पूरी संभावना है.

सरकार ने कहा कि भारत में आबादी ज्यादा है और सामाजिक, आर्थिक तथा सांस्कृतिक ढांचा जटिल है. ऐसे में अवैध रूप से आए हुए रोहिंग्याओं को देश में उपलब्ध संसाधनों में से सुविधायें देने से देश के नागरिकों पर बुरा प्रभाव पड़ेगा.इससे भारत के नागरिकों और लोगों को रोजगार, आवास, स्वास्थ्य और शिक्षा से वंचित रहना पड़ेगा. साथ ही इनकी वजह से सामाजिक तनाव बढ़ सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है. केंद्र सरकार ने 2012 और 2013 की सुरक्षा एजेंसी की रिपोर्ट भी सील कवर में सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की है.

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तोपों की सलामी के साथ एयरफोर्स मार्शल अर्जन सिंह को दी गई अंतिम विदाई

भारतीय वायु सेना के मार्शल और 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के नायक अर्जन सिंह का आज दिल्ली में राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। उनके सम्मान में आज दिल्ली सभी सरकारी इमारतों में राष्ट्रध्वज आधा झुका रहेगा। उनका अंतिम संस्कार सुबह 10 बजे किया गया। अर्जन सिंह वायुसेना के एकमात्र अधिकारी थे, जिन्हें फाइव स्टार रैंक प्रदान किया गया था। उनका 98 साल की उम्र में शनिवार को निधन हो गया। अर्जन सिंह का अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत के लायलपुर में 15 अप्रैल 1919 को जन्म हुआ था।

लाइव अपडेट्स

10:10AM :  तोपों की सलामी के साथ अर्जन सिंह को दी जा रही अंतिम विदाई।

09: 45 AM: लाल कृष्ण आडवाणी भी अर्जन सिंह को श्रंद्धांजलि देने पहुंचे।

09: 25AM : पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी दी अर्जन सिंह को श्रद्धांजलि।

9.16AM: रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी श्रद्धांजलि

9.15AM: राजकीय सम्मान के साथ दी जा रही है अंतिम विदाई

9.00AM: बरार स्क्वायर पहुंचा एयरफोर्स के मार्शल अर्जन सिंह का पार्थिव शरीर

8.30 AM: सेना की गाड़ी में एयरफोर्स के मार्सल अर्जन सिंह का पार्थिव शरीर बरार स्क्वायर के लिए ले जाया गया


अर्जन सिंह का शनिवार शाम को दिल्ली के आर्मी रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में निधन हो गया था। वह 98 वर्ष के थे और दिल का दौरा पड़ने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था। एक आधिकारिक सूचना के अनुसार दिल्ली के भवनों पर सोमवार को राष्ट्रध्वज आधा झुका रहेगा। एअर मार्शल का कल ही सुबह दस बजे राजकीय सम्मान के साथ बरार स्क्वैयर पर अंतिम संस्कार किया जाएगा।

1965 के युद्घ के लिए मिला था फाइव स्टार रैंक
अर्जन सिंह 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय भारतीय वायु सेना के प्रमुख थे। उस युद्घ में भारत की जीत में वायु सेना और अर्जन सिंह का योगदान अतुलनीय था। जिसके लिए इन्हें फाइव स्टार रैंक दिया गया था। 44 साल की उम्र में ही अर्जन सिंह को भारतीय वायु सेना की कमान सौंप दी गई थी। वह स्विजरलैंड में भारत के राजदूत और केन्या में उच्चायुक्त पद पर भी रह चुके हैं। उन्हें 1965 के युद्ध में बेहतरीन नेतृत्व करने के लिए पद्म विभूषण से सम्मानित भी किया गया है।

उन्हें 44 साल की आयु में ही भारतीय वायु सेना का नेतृत्व करने की जिम्मेदारी दी गई थी, जिसे उन्होंने शानदार तरीके से निभाया. साल 1965 की लड़ाई में जब भारतीय वायु सेना अग्रिम मोर्चे पर थी तब वह उसके प्रमुख थे। अलग-अलग तरह के 60 से भी ज्यादा विमान उड़ाने वाले सिंह ने भारतीय वायु सेना को दुनिया की सबसे शक्तिशाली वायु सेनाओं में से एक बनाने और विश्व में चौथी सबसे बड़ी वायु सेना बनाने में अहम भूमिका निभाई थी।

1965 में पद्म विभूषण से सम्मानित 

बहुत कम बोलने वाले व्यक्ति के तौर पर पहचाने जाने वाले सिंह ना केवल निडर लड़ाकू पायलट थे, बल्कि उनको हवाई शक्ति के बारे में गहन ज्ञान था जिसका वह हवाई अभियानों में व्यापक रूप से इस्तेमाल करते थे। उन्हें 1965 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। वह एक अगस्त 1964 से 15 जुलाई 1969 तक भारतीय वायुसेना के प्रमुख रहे।

स्विट्जरलैंड में भारत के राजदूत भी रहे

वायुसेना से सेवानिवृत्ति के बाद अर्जन सिंह को 1971 में स्विट्जरलैंड में भारत का राजदूत नियुक्त किया गया।  इसके साथ ही उन्होंने वैटिकन में भी राजदूत के रूप में सेवा दी।  वह 1974 में केन्या में उच्चायुक्त भी रहे। वह राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के सदस्य तथा दिल्ली के उपराज्यपाल भी रहे। उन्हें जनवरी 2002 में वायुसेना का मार्शल बनाया गया था।

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राम रहीम पर हत्या के दो मामलों में अलग-अलग होगी सुनवाई, हो सकती है फांसी की सजा

बलात्कार मामले में 20 साल की सजा भुगत रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। उनके पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह ने पत्रकार रामचंद्र और रणजीत सिंह की हत्या मामले में फिर से गवाही देने की बात कही है।  वहीं सीबीआई की विशेष अदालत ने सीबीआई की उस याचिका को स्वीकार कर लिया है जिसमें राम रहीम के खिलाफ हत्या के दोनों मामलों की अलग-अलग सुनवाई का फैसला लिया है।

सीबीआई के वकील एसपीएस वर्मा के अनुसार, विशेष सीबीआई कोर्ट ने दोनों मामलों पर अलग-अलग सुनवाई करने का फैसला किया है। कोर्ट रणजीत सिंह के मामले पर रोजाना आधार पर 18 सितंबर से जबकि छत्रपति हत्याकांड पर 22 सितंबर को सुनवाई करेगी। सीबीआई जज जगदीप सिंह लोहान ने दोनों मामलों में अलग-अलग सुनवाई करते हुए यह व्यवस्था दी।

ये हैं अन्य आरोपी
दोनों मामलों में डेरा प्रमुख गुरमीत समेत आठ अन्य मुख्य आरोपी हैं। छत्रपति हत्याकांड में गुरमीत के अलावा डेरा प्रबंधक कृष्ण लाल, शूटर कुलदीप सिंह और निर्मल सिंह मुख्य आरोपी हैं जबकि रणजीत हत्याकांड में अवतार, इंदरसेन, जसबीर सिंह, सबदिल सिंह और कृष्ण लाल आरोपी हैं। इनमें कृष्ण लाल छत्रपति हत्याकांड में भी आरोपी हैं।

फांसी की सजा तक हो सकती है
रणजीत और छत्रपति हत्याकांड में आरोप साबित होने पर डेरा प्रमुख गुरमीत को उम्रकैद या मौत की सजा हो सकती है। इन दो मामलों के अलावा गुरमीत के खिलाफ डेरा अनुयायियों को नपुंसक बनाने के आरोप में भी मामले चल रहे हैं।

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बाइक-कार चलाने वाले भूखे नहीं मर रहे, कीमत देनी होगी पेट्रोल की: अल्फोंज

नई दिल्ली। पिछले दिनों विदेशी पर्यटकों को अपने देश से बीफ खाकर भारत आने की सलाह देने वाले केंद्रीय पर्यटन मंत्री केजे अल्फोंज का नया विवादास्पद बयान आया है। जहां देशभर में पेट्रोल की कीमतों में आग लगी है वहीं मंत्री जी का कहना है कि लोगों को यह कीमत देनी होगी।

शनिवार को दिए एक बयान में उन्होंने कहा कि कार और बाइक चलाने वाले भूखे नहीं मर रहे हैं, वो गरीब नहीं हैं। जो लोग पेट्रोल-डीजल का पैसा दे सकते हैं उन्हें देना होगा। हम गरीबों को अच्छी जिंदगी देना चाहते हैं। इसलिए हमने टैक्स लगाया, टैक्स से मिलने वाला पैसा गरीबों के लिए उपयोग होगा, हम लेकर भाग नहीं जाएंगे।

अल्फोंज ने कहा कि सरकार गरीबों के लिए कई काम कर रही है। उनके लिए घर बनाना, शौचालय बनाना, स्कूल बनाना इसके लिए बड़ी रकम की जरूरत है और इसलिए टैक्स लगाए गए हैं ताकि उन पैसों से गरीबों के लिए काम किए जा सकें। टैक्स उन पर लगाया गया है जो वहन कर सकते हैं।

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