शनिदेव बदल रहे हैं चाल, चमकेगी इन 5 राशि वालों की किस्‍मत

न्याय के देवता शनि देव 6 सितंबर से अपनी चाल बदल रहे हैं। इसके प्रभाव से इन 5 राशियों की किस्मत के ताले खुलने की उम्‍मीद है। इनके रुके या अटके हुए काम बन जाएंगे और सफलता कदम चूमेगी। कौन सी हैं वह 5 राशियां जिनके जीवन में आएगा यह बदलाव।

मेष राशि
आप की सोची गई सभी योजनाएं शनि देव की कृपा से पूरी होने वाली हैं। लंबे समय से रुके हुए काम पूरे हो जाएंगे। शनिदेव की कृपा से इस राशि के लोगों का भाग्य खुल गया है। भाग्य की मदद तो आपके साथ बनी ही रहेगी लेकिन आपको धैर्य भी रखना होगा। ऐसे में देरी तो जरूर होगी लेकिन आपके सभी अच्छे कार्य सफल होंगे।

कर्क राशि
लंबे समय से चल रहे कर्ज से छुटकारा मिलने के संयोग हैं। जो असफलता के कारण आज तक आपको हानि होती आई है उससे छुटकारा मिलेगा। व्यापार में भी आप प्रगति की ओर बढ़ेंगे। अदालत में अनसुलझे मामले निपटने की उम्‍मीद बढ़ गई है। आगे आने वाले सभी अहम फैसले आपके पक्ष में होने वाले हैं। शनि देव आपका भरपूर साथ देंगे और लंबे समय से चल रही परेशानी से छुटकारा मिलेगा।

तुला राशि
शनिदेव का साथ मिलने के कारण तुला राशि के लोग साहस और पराक्रमशील हो जाएंगे। तुला राशि के लोगों का भाग्य भरपूर साथ देगा। जो भी आपकी मुराद अब तक पूरी नहीं हो पाई है शनि देव अब उसे पूरी कर देंगे। केवल आपको कार्यक्षेत्र में थोड़ी अधिक मेहनत करने की जरूरत है इससे आप सफल जरूर होंगे। पारिवारिक तनाव कम होने के संकेत भी दिख रहे हैं।

वृश्‍चिक राशि
इस राशि के जो लोग धन के कमी से ग्रस्त थे, जल्द ही इस समस्या से छुटकारा मिलने की उम्‍मीद है। शनिदेव की अनुकंपा से ठंड की वजह से पिछड़े कार्य सफल होंगे। भौतिक संसाधनों में सुख का संयोग बन रहा है। शेयर के कारोबार में आपको अच्छा फायदा मिल सकता है। कामकाज और मुनाफा को देखते हुए परिवार को कम समय देना आपकी भूल हो सकती है इसलिए ऐसा करने से बचें।

मकर राशि
मकर राशि के लोग हर काम को धैर्य और संयम से करते रहें, सफलता जरूर मिलेगी। जल्द ही शनिदेव आपकी राशि के स्वामी बनने वाले हैं जिसके कारण रुके हुए सभी कार्य सफल होंगे। आपको धन से संबंधित लाभ भी मिलने वाला है। यह साल खत्म होते-होते शनिदेव आप पर महान कृपा करके जाएंगे साथ ही आप अच्छा मुनाफा भी मिलेगा।

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रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्त

श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाए जाने पर्व रक्षाबंधन के मौके पर बहनें अपने भाइयों को अमृत मुहूर्त में राखी बांधें तो ज्यादा उपयुक्त होगा। शक्ति ज्योतिष केंद्र के पंडित शक्तिधर त्रिपाठी के अनुसार अमृत मुहूर्त के समय राखी बांधना बहुत ही शुभ माना जाता है। प्रयास करें कि इसी समय अपने भाई को राखी बांधें।
रक्षाबंधन रविवार 26 अगस्त को है। इस दिन पूर्णिमा तिथि का मान सूर्योदय से लेकर शाम 04:20 बजे तक रहेगा। इस समय पूर्णिमा के दिन करने वाले सभी शुभ कार्य किए जाएंगे। ब्राह्मणों का खास पर्व श्रावणी भी इसी दिन मनाया जाएगा। श्रावण पूर्णिमा को चातुर्मास के सबसे शुभ दिन के रूप में माना गया है। इसमें किए हुए शुभ कार्यों का कई गुना फल प्राप्त होता है।
राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त
पंडित शक्तिधर त्रिपाठी के अनुसार रविवार को सुबह 7:43 बजे से 9:18 बजे तक चर
सुबह 9:18 बजे से लेकर 10:53 बजे तक लाभ
सुबह 10:53 बजे से लेकर 12:28 बजे तक अमृत मुहूर्त का समय रहेगा।
इसके बाद दोपहर 2:03 बजे से लेकर 3:38 बजे तक शुभ,
शाम 6:48 बजे से लेकर 8:13 बजे तक शुभ, रात 8:13 बजे से लेकर 9:38 बजे तक अमृत
रात 9:38 बजे से लेकर 11:03 बजे तक चर मुहूर्त रहेगा। उन्हों ने बताया कि इन मुहूर्तों में राखी बांधी जा सकती है।
संकटी श्री गणेश चतुर्थी/बहुला बुधवार को रक्षा बंधन के बाद बहनें भाई के समस्त संकट हरण के लिए श्री गणेश व्रत रखती हैं। जिसको पूर्वी उत्तर प्रदेश में ज्यादा मान्यता दी जाती है। यह पर्व इस वर्ष बुधवार 29 अगस्त को है। इसी दिन पुत्रवती महिलाएं अपने पुत्र की आयु वृद्धि की कामना से गणेश चतुर्थी का व्रत रखती हैं। शक्ति ज्योतिष केंद्र के पंडित शक्तिधर त्रिपाठी के अनुसार रात के 08:17 बजे चन्द्रोदय होने पर ‘ओम् सोम सोमाय नमः’ मंत्र से चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद व्रत पूरा करेंगी।

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” आत्म शुद्धि ” के अर्चना, आराधना होती है – मुनि पीयूष सागर

ध्वजारोहण और मंडल कलश स्थापना के साथ पदमपुरा में शुरू हुआ नवदिवसीय भगवत जिन पदमप्रभ महार्चना एवं विश्वकल्याण कामना महायज्ञ

जयपुर। अतिशय क्षेत्र बाड़ा पदमपुरा दिगम्बर जैन मंदिर में नवदिवसीय नवरात्रा भगवत जिन पदमप्रभ महार्चना एवं विश्वकल्याण कामना महायज्ञ का शुभारम्भ अंतर्मना मुनि प्रसन्न सागर महाराज एवं मुनि पीयूष सागर महाराज और गणिनी आर्यिका गौरवमती माताजी ससंघ सानिध्य में प्रातः 7 बजे ईशागढ निवासी हर्षित, राजेश जैन परिवार द्वारा ध्वजारोहण कर किया गया।
समिति मंत्री हेमंत सोगानी ने बताया की नवदिवसीय भगवत जिन पदमप्रभ महार्चना विधान पूजन मंडल शुद्धि संस्कार व आचार्य, मुनि आमंत्रण संस्कार विधि क्रिया कर बाल बह्मचारी तरुण भईया, इंदौर के निर्देशन में प्रारम्भ हुई। संस्कार क्रिया विधि पश्चात् मंडल पर कलश स्थापित किये गए। कलश स्थापन पश्चात् विधान पूजन की क्रिया विधि संगीत, भजन साथ प्रारम्भ हुई और सभी इन्द्रो सहित श्रावको ने अपने कर्मो की निर्जरा की कामना के साथ अष्ट द्रव्यों से विधान पूजन किया, जिसमे सभी श्रावको ने जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नैवेघ, दीप, धूप, फल के साथ अर्घ चढ़ा सम्पूर्ण जयमाला महार्घ चढ़ाये। मुनि प्रसन्न सागर महाराज संघस्थ मुनि पीयूष सागर महाराज ने विधान पूजन में सम्मिलित श्रावको को सम्बोधित करते हुए कहा की
” भगवत जिन महार्चना का यह विधान कर्मो की निर्जरा का प्रतीक है जिसमे सम्मिलित होने वाला श्रावक और श्राविकाएँ अपने आत्म शुद्धि की और अग्रसर होकर जिनेन्द्र प्रभु की अर्चना और आराधना कर सकते है, पूजन, भक्ति आत्म शुद्धि का वो द्वार है जिसमे प्रवेश करने के पश्चात् प्रत्येक श्रावक का जीवन धन्य और सौभाग्यशाली बन जाता है। इस जगत प्रत्येक प्राणी को अपनी आस्था और श्रद्धा पर विश्वास कर अर्चना, आराधना करनी चाहिए, यह आत्म शुद्धि का सबसे प्रमुख द्वार है। ”
मिडिया प्रभारी अभिषेक जैन बिट्टू ने बताया की महार्चना प्रथम से ही विधान पूजन में श्रावक और श्राविकाएँ देशभर से उमड़ने प्रारम्भ हो गए गुरूवार को 21 जोड़ो सहित 50 से अधिक एकल में श्रावको ने विधान पूजन कर अर्घ चढ़ाये। सायंकालीन में मूलनायक पदमप्रभ भगवान की महामंगल आरती एवं सामूहिक चलीसा का आयोजन किया गया जिसमे श्रावको ने श्रद्धा – भक्ति के साथ मंगल आरती की और गुरु आरती की, आरती के पश्चात् मुनि पीयूष सागर महाराज एवं गणिनी आर्यिका गौरवमती माताजी ससंघ सानिध्य में गुरुभक्ति का आयोजन हुआ।

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प‍ितृ व‍िसर्जन: अमावस्‍या पर ऐसे दें प‍ितरों को व‍िदाई, जीवन से दूरी होगी हर कठ‍िनाई

प‍ितर आशीर्वाद देते:
ह‍िंदू धर्म में प‍ितृपक्ष बेहद खास माना जाता है। यह हर वर्ष भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा से शुरू होता है और आश्विन कृष्ण अमावस्या तक रहता है। इन 15 द‍िन प‍ितरों को याद क‍िया जाता है। उनका श्राद्ध, तर्पण और प‍िंडदान क‍िया जाता है। इसके बाद अमावस्‍या के द‍िन सभी प‍ितरों को व‍िध‍िव‍िधान से व‍िदाई देने से प‍ितर प्रसन्‍न होते हैं और अशीर्वाद देते हैं। ज‍िससे जीवन में खुशि‍यां आती हैं और आर्थि‍क तंगी दूरी होती है।

इस समय करें व‍िदा :
पितृ विसर्जन का समय 19 सितम्बर, 2017 को दोपहर 11 बजकर 52 मिनट से शुरू होगा क्‍योंक‍ि इसी समय से अमावस्‍या की शुरुआत होगी। इसके बाद 20 सितम्बर, 2017 को सुबह 10 बजकर 59 मिनट तक अमावस्‍या रहेगी। ऐसे में प‍ितरों को व‍िदा करने यानी क‍ि व‍िसर्जन का यह सही समय होगा। व‍िदाई के समय सभी प‍ितरों से हाथ जोड़कर अनजाने में हुई भूल की क्षमा याचना करना न भूलें।

तर्पण, श्राद्ध और प‍िंडदान:
अमावस्‍या के द‍िन सुबह स्‍नान ध्‍यान से न‍िवृत्‍त होकर सभी प‍ितरों को तर्पण क‍िया जाता है। तर्पण में प‍ितरों को अंजुली से जल द‍िया जाता है। कहते हैं इस आख‍िरी द‍िन जल के तर्पण से पितरों की प्यास बुझती है। इसके अलावा श्राद्ध और प‍िंडदान होता है। प‍ितृ व‍िसर्जन में प‍िंड दान की प्रक्रिया व‍िध‍िवि‍धान से न‍िभाई जाती है। वहीं आखि‍री द‍िन श्राद्ध कर ब्राह्मणों को भोजन कराना और दक्ष‍िणा देना अन‍िवार्य माना जाता है।
इन्‍हें जरूर कराएं भोजन:
प‍ितृ व‍िसर्जन पर श्राद्ध करते समय श्राद्ध में तैयार भोजन में से गाय, कुत्ते, कौए, देवता और चींटी के लिए जरूर पांच भाग निकालें। मान्‍यता हैं क‍ि इनसे सीधे प‍ितरों को भोजन म‍िलता है। इसके अलावा अमावस्‍या के द‍िन अगर कोई भिखारी द्वार पर आए तो उसे वापस न करें बल्‍क‍ि उसे घर पर बने सभी व्‍यंजन ख‍िलाकर भेजे। अमावस्‍या के द‍िन प‍ितरों के ल‍िए एक थाल में कच्‍चा अनाज भी न‍िकाल कर द‍ान कर सकते हैं।

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सितारों की दुर्दशा से ऐसे करिए बचाव

नई दिल्ली. आपके सितारों की स्थिति के कारण आपके बहुत से काम बनते और बिगड़ते हैं. अगर ये सितारे अनुकूल स्थितियों में है तो आपका सफल होना तय है.

लेकिन इनकी स्थितियां अगर प्रतिकूल हो तो आपके लिए आध्यात्मिक गुरु पवन सिन्हा कुछ नुस्खे लेकर हैं, जिनका आपको पालन करना चाहिए. जानिए सितारे गुडलक गुरु के साथ…

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